Monday, 4 July 2011

वक़्त वक़्त की बात हुआ करती है.........

वक़्त वक़्त की बात हुआ करती है,
कभी महफ़िल तो कभी तन्हाई हुआ करती है,

है हर ख़ुशी उसके जाने के बाद भी हासिल ,
पर फिर भी न जाने क्यों उसकी कमी महसूस हुआ करती है....

मोह्हबत के परिंदों से न पूछ जात उनकी,
यह सरहदें भी इनकी गुलाम हुआ करती हैं,

है दुनिया में हर जगह अँधेरा छाया हुआ,
पर शम्मा सिर्फ परवाने के लिए जलती है...

बिखर जाता है हर शक्स मोह्हबत में टूट के,
पर आशिको  की भीड़ कभी कम नहीं हुआ करती है,

मुखलूस है चाँद ही पन्ने मोह्हबत की किताब में आबादी के,
बाकि बर्बादी से तो पूरी किताब छपी होती है.....

एक सुनहरा सपना जो पूरा नहीं हो पता.......

मैं जिससे हर वक़्त मिलना चाहता हूँ,
कभी कभी वो मेरे ख्वाबों में आ जाती है,
साँझ ढलती है, चाँद निकलता है, और धीमी बारिश शुरू हो जाती है,
मैं उसके आघोष में वो मेरे आघोष में,
और हमारी गुफ्तगू शुरू हो जाती है.....

चारो तरफ सन्नाटा हो जाता है ,
मेरे कानो को सिर्फ उसकी धड़कन सुनाई देती है,
थोडा सा शर्माती है, थोडा सा घबराती है,
फिर मेरे माथे पर एक प्यारा सा चुम्बन कर,
अपना डर दूर भगाती है....

समंदर की लहरें शांत रहती है,
दीप की रौशनी जगमगाती है,
मेरे हाथों में सिन्दूर देख, उसके चेहरे पर एक चमक आ जाती है,
फिर थोडा शर्माती है , सर पर घूँघट डालती है, और मुझे निहारती है,
फिर जैसे ही अपने हाथ उसकी मांग में सिन्दूर सजाने को बढ़ता हूँ,
कम्भखत ख्वाब टूट जाता है और नींद खुल जाती है....

जिंदगी एक बार फिर तनहा हो जाती है,
उसे अपने पास न पाकर मेरे चेहरे से रौनक लौट जाती है...


Friday, 20 May 2011

कुछ बातें मेरी और उसकी (रूह से रूह की ) जुबां की नहीं ............

आज हूँ कल शायद न रहूँ, साथ अभी दे रहा हूँ कल शायद छोड़ जाऊं,
आज हस रहा हूँ तेरे संग, कल शायद तन्हाई में रोऊँ
आज याद करता हूँ तुझे, कल शायद भूल जाऊं,
आज चल रहा हूँ तेरे संग, कल शायद तनहा छोड़ कहीं चला जाऊं,
आज तुझे देखता रहता हूँ हर पल, कल शायद ख्वाबों में भी देखने को तरस जाऊं,
आज तुझसे मोह्हबत कर रहा हूँ, कल शायद तेरी दोस्ती को भी तरस जाऊं.......

( सुनकर मेरी यह बातें उसके दिल में दर्द सा उठा और कहने लगी.. )

कल तू न रहा तो तुझे खुदा से छीन लाऊँगी
तुने साथ जो छोड़ा अगर, तो में भी तेरी और खींची चली आउंगी,
तन्हाई में तू कैसे रोएगा, तेरे दिल में अपनी तस्वीर छुपा दूंगी,
तू भूलेगा मुझे अगर तो में याद बनकर फिर तेरी धडकनों में समां जाउंगी,
तनहा छोड़ने की बात न कर, में कबी तेरा साथ न छोडूंगी, नहीं तरसेगा तू मेरी दीदार को,
आँखों में बसा दूंगी अपने प्यार को, आँखें बंद करना और सामने पाना अपने यार को,

(फिर धड़कन बड़ने लगता है उसकी और आँसूं बहाते हुए कहती है )

बस तेरा यही सवाल बड़ा परेशान करता है मुझे "अंकित" यह मोह्हबत है या दोस्ती तय  करने से डरता है दिल....... 

 

Friday, 22 April 2011

Dedicated to all MOTHERS "माँ "

माँ शीतल है, माँ निर्मल  है,
माँ दौलत है, माँ शोहरत है,
माँ डूबती नईया का सहारा है,
माँ सरल स्वरुप 2 का पहाडा है,
माँ की आँखों में मुझे सारा संसार नजर आता है,
मुझे मेरी माँ में ईशवर नजर आता है....

भूकी रहकर बच्चो को ढूध पिलाये वो माँ है,
मखमली गद्दे पर सुला कर खुद ज़मीन पर सोजाए वो माँ है,
कुछ भी न कहने पर सब कुछ समझ जाये वो माँ है,
माँ चाँद है, माँ सूरज है,
माँ सितारों से भरा आकाश है,
माँ खुशनुमा फूलों से भरी वादी है,
जो हर दुःख को दूर ले जाए, मेरी माँ वो तेज आंधी है....

जिंदगी में सहनशीलता सिखाये जो वो माँ है,
आँचल में छुपाकर कड़ी धुप से बचाए वो माँ है,
बच्चो की लम्बी उम्र के लिए नंगे पैर पहाड़ चढ़ जाये वो माँ है,
अपनी हर इच्छा भुला के बच्चो की इच्छा पूरी करे जो वो माँ है,
माँ धेर्य है, माँ शांति है,
माँ अंधियारे में जलती हुई लौ के भांति है,
माँ के स्पर्श से सारा दुःख दूर हो जाता है,
मुझे मेरी माँ के आँचल में स्वर्ग नजर आता है......

माँ की आँख में कभी आंसूं न आने देना,
उसे इस दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान देना,
क्यूंकि माँ से बढ़कर इस दुनियां में कोई और नहीं है,
वो तेरी जननी है उसकी मोह्हबत का कोई मोल नहीं है..... 

Tuesday, 12 April 2011

न जाने क्यों तेरे संग.......

न जाने क्यों तेरे संग वक्त गुजारना अच्हा लगता है.....
तेरी हर ख्वाहिश को पूरा करना अच्हा लगता  है...
दिल तो बहुत है इस दुनिया में...
पर न जाने क्यों तेरे दिल पर मर मिटना अच्हा लगता है.......

न जाने क्यों तुझे हसाना अच्हा लगता है.......
तेरी एक मुस्कुराहट के लिए आंसू बहाना अच्हा लगता है.....
चेहेरे तो बहुत है इस दुनिया मैं.....
पर न जाने क्यों तेरे ही चेहेरे पर मर मिटना अच्हा लगता है.......

न जाने क्यों तेरी आँखों में डूब जाना अच्हा लगता है...
तेरी आँखों में अपनी तस्वीर देखना अच्हा लगता है..
ख़ूबसूरती तो बहुत है इस दुनिया में....
पर न जाने क्यों तेरी सादगी पर मिटना अच्हा लगता है...

न जाने क्यों तेरे करीब रहना अच्हा लगता है...
तेरी हर एक बात को सुनना अच्हा लगता है....
आवाज़ तो बहुत है इस दुनिया मैं....
पर न जाने क्यों तेरी आवाज़ पर मर मिटना अच्हा लगता है.......

और
न जाने क्यों यह दिल तुझसे दूर रहना नहीं चाहता है.....
एक पल का इंतज़ार सहना नहीं चाहता है...
इसलिए तकलीफ देते है शायद तुझको....
जब हमारा कोई सवाल बार बार तेरे पास आता है.....

Sunday, 27 March 2011

वो रात का मंजर ही कुछ अलग था.... (For AKASH BHAIYA) @dextrousworld

वो रात का मंजर ही कुछ अलग था,
वो शाम में कशिश ही कुछ अलग थी,
जिंदगी में मेरी चार चाँद लग गए थे,
जब मैंने तुझ जैसा दोस्त पाया था....

वो तेरा मुझे प्यार से छोटे बुलाना,
वो तेरा मुझे हर बात पर एक सीख देना,
वो तेरा मुझे हमेशा सताते रहना,
हर एक पल को मैंने ख़ास संजो के रख लिया है,
जिंदगी के उन पलों को मैंने फूलों की माला की तरह पीरों के रख लिया है......

वो तेरा मेरी गलतियों को नादानी समझना,
वो तेरा मेरी शरारतों  के लतीफे बनाना,
हर एक पल को सपनो से हकीकत में आते देखा है मैंने,
जो प्यार मुझे तुझसे मिला उन्हें वहीँ थाम दिया है मैंने.....

न जाने क्या गलती कर बैठा में नादान,
शब्दों से खेलना सीखा नहीं मैंने,
लगता है इसलिए तेरे दिल को दुखा बैठा में नादान,
मेरी हर गलती की सजा में भुगतना चाहता हूँ,
हर सजा मंज़ूर है बस तुझसे दूर नहीं रहना चाहता हूँ......

मुझे एक दफा फिर तू उतना ही प्यार दे,
मेरी गलतियों को फिर नादानी  समझ कर कर टाल दे..........


I AM SORRY AKASH BHAIYA (@Dextrousworld)

Friday, 4 March 2011

क्या तुझे याद है ...........

वो पहला मिलन तेरा और मेरा,
वो काली घनी रात में दूर दिखता सवेरा,
वो तेरी मेरी निग़ाहों का मिलना,
वो तेरा हया से पलके झुकाना,
वो तुझे ताकते रहते हुए मेरा मुस्कुराना,
वो तेरा अदा से पलके उठाकर, मेरी मुस्कराहट का जवाब देना,
क्या तुझे याद है वो पहला मिलन हमारा...

वो तेरा  रूठना, वो मेरा मनाना,
वो तेरा हसना, वो मेरा तुझे हस्ते हुए निहारना,
वो तेरी खुदा से मोह्हबत, वो मेरी तुझसे मोह्हबत,
वो तेरा अपनी जुल्फों को सवारना,
वो मेरा तेरी जुल्फों में छिप जाना,
वो तेरा काजल लगाना, वो मेरा तेरी आँखों से काजल मिटाना,
क्या तुझे याद है, तेरी मेरी निग़ाहों का झुकना और फिर उठ जाना.......

वो तेरी सादगी को मेरा निहारना,
वो तेरा मेरी बाहों में सिमट जाना,
वो तेरे लबो से मेरा नाम पुकारना, और वो तीन लफ्जों को सुनकर मेरा मुस्कुराना,
वो तेरा मेरे सपनो में आना,
वो मेरा तुझे अपने सपनो में देखने लिए लिए हर वक़्त अपनी आँखें बंद रखना,
क्या तुझे याद है, वो तेरा मेरा सपनो का महल बनाना ....... 

वो जिंदगी  के हसीन  पल, मुझे वापिस लौटा दे,
मुझसे मोह्हबत भले न कर, पर निगाहें तो  मिला ले,
वो पल तू फिर से याद कर कभी, अगर मेरी मोह्हबत सच्ची लगे,
तो अज फिर मेरे आग़ोश में सिमट जा अभी....




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