Sunday, 18 December 2011

ज़रा तुम मोह्हबत निगाहों से ही करना.......

नयी नयी सी मोह्हबत है दिलों में अभी,
अपने अल्फाजों को थोडा लगाम देना,

कब कहाँ किसका दिल बदल जाये मोह्हबत में,
हो सके तो अपनी जुबां खामोश रखना,

टूटता है दिल जब अल्फाजों से तो, जुड़ता नहीं आसानी से,
ज़रा तुम मोह्हबत निगाहों से ही करना,

कभी कभी झूठ भी कह जाते हैं यह अलफ़ाज़,
तुम गुफ्तगू भी निगाहों से ही करना,

अक्सर बहक जाते हैं लोग महकाने जाके,
सुनो, तुम नशा भी मेरी आँखों से ही करना,

लिखी जाएगी हमारी भी दास्तान ए मोह्हबत किताबों में,
फ़क़त(सिर्फ) तुम कभी यह लब हिलाने की तक्कल्लुफ़  न करना.......   

Friday, 9 December 2011

रोने से बेवफा सनम लौट कर आता नहीं....

दीदार ए यार का नशा उतरता नहीं,
और वक़्त उन्हें हमसे मिलने का मिलता नहीं,

बहुत मशरूफ हैं वो अपनी महफिलों में,
की अब तनहा खड़ा "अंकित" उन्हें दीखता नहीं,

उसको होती अगर तेरी फिकर ज़रा भी,
तू तुझे यूँ रोता देख वो मुस्कुराता नहीं,

खता तुने ही की अपनी मोह्हबत में,
हद से ज्यादा न चाहता तो वो बेवफा होता नहीं,

लाख समझाया तुझे लेकिन तू न माना,
की हर खूबसूरत चेहरा वफादार होता नहीं,

अब आंसूं पोंछ और मुस्कुरा उसे देखकर,
रोने से बेवफा सनम लौट कर आता नहीं....

Thursday, 8 December 2011

तू ही तू तू ही तू.....

दर्पण दर्पण पूछ रहा है, मुझसे अब मेरा वजूद,
उसको कैसे समझाऊँ में, मेरे नस नस में है तू,
भूल गया में खुद को जबसे, चाहा है मैंने तुझको,
धड़कन से लेकर आँखों तक, बस तू ही तू तू ही तू,

चल पड़ा हूँ उस रास्ते,जिसकी न कोई मंजिल है,
किसको मोह्हबत में हासिल, हुई बोलो ख़ुशी है,
कैसे दिखलाऊँ में तुझको रंग अपनी चाहत का,
मेरे रग रग में तो है, बस तू ही तू तू ही तू,

सजदे किये लाखों मैंने मंदिर मस्जिद जा जाके,
लौट आया लेकिन खाली हाथ रोते गाते,
जबसे तुझको पूजा मैंने, हर ख़ुशी हासिल हुई,
अब से मेरा खुदा है, बस तू ही तू तू ही तू.....

Sunday, 27 November 2011

ज़रा एक तस्वीर तुम्हारी देते जाओ....

जाते हो सनम तुम, बेशक जाओ,
पर लौट के आने का वक़्त बतलाते जाओ,

न जाने फिर कब मौका मिले मिलने का हमें,
ज़रा एक तस्वीर तुम्हारी देते जाओ,

तेरी कलाई मुझे यूँ सूनी अच्छी नहीं लगती,
जो कंगन खरीदे थे साथ वो पेहेनते  जाओ,

न जाने किस राह पर मिल जाएँ बुरी नजर वाले,
अपने रुखसार पर काजल लगाते जाओ,

कोई और न देखे तुम्हे मोह्हबत से, मेरे सिवा,
तुम जुल्फों को अपनी बांधते जाओ,

बहुत दिलफरेब होती है यह नजरे,
तुम अपनी  निघाओं को झुखाते जाओ,

डर सताएगा मुझको तेरी खेरियत का हमेशा,
हिफाज़त के लिए मेरे नाम का सिन्दूर लगाते जाओ.....

Monday, 14 November 2011

ए आवारा देख यह क्या हो गया...

ए आवारा देख यह क्या हो गया,
जिसे तुने छोड़ा था तनहा, वो किसी और का हो गया,

जिसका जिस्म तुझे नजर आता था खिलौना,
वो किसी की इबादत का घर बन गया,

जिसकी आँखों के आंसूं लगते थे तुझे पानी,
उन मोतियों का अब कोई सागर हो गया,

जिसके होंठों से चीन ली थी तुने मुस्कराहट,
अब वो तुझपे हसने के काबिल हो गया,

जिसके दामन में तुने उछाले थे कई दाग,
आज वो दामन सबसे पाक हो गया,

जिसके चेहरे पर तुने दिए थे कई निशाँ,
देख आज वो चेहरा चाँद सा खूबसूरत हो गया,

सच्ची मोह्हबत का ही करम है उसपर,
की वो आबाद और तू बर्बाद हो गया.....

Sunday, 6 November 2011

न जाने क्या जादू था उनकी आँखों में.....

फितरत ए मोह्हबत बदल न पाए,
दिल्लगी को हम रोक न पाए,

खुद को लाख संभाला, पर संभल न पाए,
उनके इज़हार ए मोह्हबत पर इनकार कर न पाए,

न जाने क्या जादू था उनकी आँखों में,
की उनकी आँखों से नजरे हटा न पाए,

गुनाह ए इश्क, फिर कर बेठे हम,
यारों हम सुधर न पाए,

अब इश्क किया है, तो उसे निभाएंगे भी,
फिर क्यों न चाहे यह  ज़माना ही रूठ जाये.....

Wednesday, 2 November 2011

कर रहें है वो गुफ्तगू हमसे, मुस्कुराने दो अभी.....

मुकाम अपना भी होगा, ढूँढेंगे कभी,
बेठे हैं सजदे मैं सर झुकाए अभी,

हिज्र का दर्द क्या है, सोचेंगे कभी,
वो सामने हैं, करने दो सूकून से उनका दीदार अभी,

जो बात हमको कहनी है, वो बोलेंगे कभी,
गुलशन है उनकी आवाज से यह दिल, सुनने दो अभी,

कैसा होता है चमकता सितारा, देखेंगे कभी,
बेठा है चाँद हमारे सामने, निहारने दो अभी,

बहुत दर्द है इस दिल में, मगर रोयेंगे कभी,
कर रहें है वो गुफ्तगू हमसे, मुस्कुराने दो अभी.....

About Me

My photo
I am very sensative and emotional type of guy, and i can't live without 3 things my love,poetry,my friends.